Gitapress Sankshipta Braham Vaivarta Puran (631)
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PRODUCT DETAILS
Gitapress Sankshipta Braham Vaivarta Puran (631) :- "संक्षिप्त ब्रह्म वैवर्तपुराण" गीता प्रेस की पुस्तक है, जिसका कोड-631 है। इस पुराण में चार खण्ड हैं - ब्रह्म खण्ड, प्रकृति खण्ड, श्रीकृष्णजन्म खण्ड और गणेश खण्ड। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तृत वर्णन, श्रीराधा की गोलोक लीला और अवतार लीला का सुंदर विवेचन, विभिन्न देवताओं की महिमा और एकरूपता, और उनकी साधना-उपासना का सुंदर निरूपण किया गया है। इसमें अनेक भक्तिपरक आख्यानों और स्तोत्रों का भी अद्भुत संग्रह है।
"संक्षिप्त ब्रह्म वैवर्तपुराण" पुस्तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी लीलाओं को संक्षेप में प्रस्तुत करती है। इसमें आपको भगवान श्रीकृष्ण की विशेषता, उनके अवतार का वर्णन, ब्रजभूमि में उनकी लीलाएं, गोपियों के प्रेम और उनके भक्तों के साक्षात्कार के दर्शन मिलेंगे। इस पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में भक्ति, अनुग्रह, प्रेम, सेवा और भगवान की पूजा-अर्चना के महत्वपूर्ण तत्वों का मनोहारी वर्णन है।
"संक्षिप्त ब्रह्म वैवर्तपुराण" पुस्तक मन को आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई तक ले जाती है और भगवान श्रीकृष्ण के प्रेमपूर्ण जीवन-चरित्र से भरपूर आदर्शों को प्रदर्शित करती है। इस पुस्तक के माध्यम से आपको भगवान श्रीकृष्ण के भक्ति में निष्ठा और आध्यात्मिक विकास के मार्ग पर प्रेरित करने का अद्भुत अवसर मिलेगा। यह पुस्तक आपके जीवन में"संक्षिप्त ब्रह्म वैवर्तपुराण" गीता प्रेस की पुस्तक है, जिसका कोड-631 है। इस पुस्तक में चार खण्ड हैं - ब्रह्म खण्ड, प्रकृति खण्ड, श्रीकृष्णजन्म खण्ड और गणेश खण्ड। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तृत वर्णन, श्रीराधा की गोलोक लीला और अवतार लीला का सुंदर विवेचन, विभिन्न देवताओं की महिमा और एकरूपता, और उनकी साधना-उपासना का सुंदर निरूपण किया गया है। इसमें अनेक भक्तिपरक आख्यानों और स्तोत्रों का भी अद्भुत संग्रह है।
"संक्षिप्त ब्रह्म वैवर्तपुराण" पुस्तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी लीलाओं को संक्षेप में प्रस्तुत करती है। इसमें आपको भगवान श्रीकृष्ण की विशेषता, उनके अवतार का वर्णन, ब्रजभूमि में उनकी लीलाएं, गोपियों के प्रेम और उनके भक्तों के साक्षात्कार के दर्शन मिलेंगे। इस पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में भक्ति, अनुग्रह, प्रेम, सेवा और भगवान की पूजा-अर्चना के महत्वपूर्ण तत्वों का मनोहारी वर्णन है।
Gitapress Sankshipta Braham Vaivarta Puran (631)
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